चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक में राज्य से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। दक्षिणी जोनल काउंसिल की बैठक में पहली बार शामिल हुए विजय ने मुख्य रूप से NEET और परिसीमन के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने तमिलनाडु को NEET से छूट देने की मांग के साथ ही परिसीमन के बाद दक्षिण भारतीय राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा को लेकर कानूनी भरोसा देने का आग्रह किया।
बैठक में विजय ने अंतरराज्यीय मादक पदार्थों की समस्या, नीली अर्थव्यवस्था और तटीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी बेहतर समन्वय और सहयोग की जरूरत बताई।
NEET पर तमिलनाडु को छूट देने की मांग
रिपोर्ट के मुताबिक, विजय ने बैठक में तमिलनाडु को NEET से छूट देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था से राज्य के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को नुकसान होता है। उन्होंने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर सीटें भरने की व्यवस्था की मांग रखी।
तमिलनाडु की पिछली सरकारें भी लंबे समय से NEET से छूट की मांग करती रही हैं। कुछ सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान विजय ने यह मुद्दा उठाया था। इससे पहले स्टालिन सरकार भी लगातार इस मांग को केंद्र के सामने रखती रही है। हाल में हुए NEET प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद इस मुद्दे को लेकर मांग और तेज हुई है।
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता रखी
विजय ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर भी अपनी चिंता अमित शाह के सामने रखी। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों में यह साझा चिंता है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से उनकी राजनीतिक आवाज कमजोर हो सकती है।
विजय ने बैठक में कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, मानव विकास और आर्थिक विकास के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। ऐसे में जनसंख्या के आधार पर परिसीमन के जरिए इन राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए।
प्रतिनिधित्व का प्रतिशत कम नहीं करने का मांगा भरोसा
सूत्रों के मुताबिक, विजय ने केंद्रीय गृह मंत्री से आग्रह किया कि दक्षिण भारत के राज्यों को यह भरोसा दिया जाए कि परिसीमन के बाद संसद में उनके प्रतिनिधित्व के प्रतिशत में किसी तरह की कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे राष्ट्रीय हितों में योगदान देने वाले राज्यों को अनजाने में नुकसान न हो।
केंद्र सरकार पहले ही आश्वासन दे चुकी है कि परिसीमन के मामले में दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं किया जाएगा और उनके प्रतिनिधित्व का प्रतिशत कम नहीं होगा। इसके बावजूद दक्षिणी राज्यों के भाजपा विरोधी दल इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
इन दलों का तर्क है कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होने पर उत्तर भारत के राज्यों को ज्यादा फायदा मिल सकता है, क्योंकि पिछले दशकों में दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत की आबादी में अधिक वृद्धि हुई है। इसी वजह से दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक पार्टियां परिसीमन को लेकर अपनी चिंताएं लगातार सामने रख रही हैं।
